नई दिल्ली: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को एक बड़ी मजबूती देते हुए पश्चिम बंगाल ने आज आधिकारिक रूप से आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) को लागू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है। इसके साथ ही राज्य इस योजना को अपनाने वाला देश का 36वां राज्य/केंद्र शासित प्रदेश बन गया (West Bengal Ayushman Bharat PM-JAY) है। यह कदम देश में समान, सुलभ और वित्तीय रूप से सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
इस अवसर पर राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता देश की सबसे बड़ी सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने की। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव और अनुप्रिया पटेल भी उपस्थित रहीं। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ National Health Authority के प्रतिनिधियों ने भी समझौता प्रक्रिया में भाग लिया।
वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से राज्य के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व के साथ नीति-निर्माण स्तर पर व्यापक समन्वय देखने को मिला।
इस समझौते के तहत पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई (West Bengal Ayushman Bharat PM-JAY) का चरणबद्ध क्रियान्वयन किया जाएगा। योजना के लागू होने के बाद राज्य के लाखों पात्र परिवारों को सेकेंडरी और टरशियरी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रति वर्ष प्रति परिवार ₹5 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध होगा। यह सुविधा सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों के नेटवर्क में मान्य होगी, जिससे मरीजों को बिना आर्थिक बाधा के इलाज प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना माना जाता है। इसकी शुरुआत के बाद से ही इसने भारत में स्वास्थ्य खर्च के बोझ को कम करने और गरीब तथा कमजोर वर्गों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के तहत देशभर में करोड़ों लाभार्थी पहले ही पंजीकृत हैं और लाखों परिवारों ने कैशलेस उपचार का लाभ उठाया है।
पश्चिम बंगाल के इस जुड़ाव के साथ अब योजना का दायरा और भी व्यापक हो गया है। राज्य में लंबे समय से स्वास्थ्य सुरक्षा कवरेज को लेकर चर्चा चल रही थी, और इस MoU के बाद अब इसे औपचारिक रूप से लागू करने की दिशा में संस्थागत ढांचा तैयार हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से न केवल राज्य के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के निजी और सार्वजनिक ढांचे में भी प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, देशभर में लागू इस योजना की पोर्टेबिलिटी सुविधा के कारण प्रवासी श्रमिकों और अन्य राज्यों में इलाज कराने वाले मरीजों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि आयुष्मान भारत योजना भारत के स्वास्थ्य इकोसिस्टम को डिजिटल और पारदर्शी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अस्पतालों के डिजिटल क्लेम प्रोसेसिंग, लाभार्थी सत्यापन और उपचार रिकॉर्ड के एकीकृत डेटाबेस ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रशासनिक ढांचे को अधिक कुशल बनाया है।
नई दिल्ली के New Delhi स्थित विज्ञान भवन में हुए इस समझौता समारोह को केंद्र और राज्य के बीच सहयोगात्मक संघीय ढांचे का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समझौते भविष्य में अन्य राज्यों को भी समान स्वास्थ्य सुरक्षा मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल का आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई में शामिल होना भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य यात्रा में एक निर्णायक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जो देश को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य के और करीब ले जाता है।



