शुभेन्दु सरकार का बड़ा फैसला: बंगाल के मदरसों की मॉर्निंग असेंबली में भी गूंजेगा ‘वंदे मातरम’

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नव-निर्वाचित शुभेन्दु सरकार (Suvendu Adhikari) ने राज्य के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग की ओर से 19 मई 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, यह नियम सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त सभी मदरसों में तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

नए निर्देश के मुताबिक, अब स्कूल और मदरसों में सुबह की प्रार्थना सभा में क्लास शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ गाना जरूरी होगा। सरकार ने सभी मदरसों से इस आदेश के पालन की रिपोर्ट भी विभाग को भेजने के लिए कहा है। अब तक मदरसों की मॉर्निंग असेंबली में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्ला गीत ‘अनंत असीम प्रेममय तुमी’ गाया जाता था। नए आदेश के बाद ‘वंदे मातरम’ को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 11 फरवरी 2026 में ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि अगर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए जाएं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही इसे गाते या सुनते समय सभी को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

नए आदेश के मुताबिक, अब सभी स्कूलों और मदरसों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद ही होगी। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।

12 दिनों में बंगाल सरकार के 12 बड़े फैसले

BSF को सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन सौंपना : भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने और बाड़ (फेंसिंग) लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 600 एकड़ जमीन 45 दिनों के भीतर दी जाएगी, जिससे सीमा से जुड़ा पुराना विवाद खत्म होगा।

बंगाल में CAA की प्रक्रिया शुरू : CAA के तहत आने वाले 7 समुदायों और 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए लोगों को नागरिकता कानून का लाभ मिलेगा। पुलिस उन्हें हिरासत में नहीं ले सकेगी।

आयुष्मान भारत और केंद्रीय योजनाओं को लागू करना : पश्चिम बंगाल सरकार अब केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत’ योजना से जुड़ गई है, जिसके तहत गरीब परिवारों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।

जनगणना को शुरू करने का फैसला : राज्य में काफी समय से अटकी पड़ी जनगणना को तुरंत शुरू करने के लिए प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के जून 2025 के इस आदेश पर पिछली सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया था।

सरकारी नौकरियों की उम्र सीमा में छूट : सरकारी नौकरियों और शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने आवेदन की उम्र सीमा में 5 साल की छूट देने का फैसला किया है।

अफसरों को केंद्रीय ट्रेनिंग पर भेजने की मंजूरी : पुरानी नीति को बदलते हुए अब राज्य के आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और डब्लूबीपीएस (WBPS) अधिकारियों को केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने की इजाजत दे दी गई है।

भारतीय न्याय संहिता को अपनाना : सरकार ने राज्य में नए केंद्रीय आपराधिक कानूनों (जैसे भारतीय न्याय संहिता) को पूरी तरह लागू करने का निर्णय लिया है। ये कानून पुराने आईपीसी और सीआरपीसी की जगह लेंगे, जिन्हें पिछली सरकार ने राज्य में आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया था।

हिंसा पीड़ित बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों को मदद : साल 2021 की चुनावी हिंसा में मारे गए 321 बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों को सरकारी नौकरी या आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके साथ ही सरकार इन मामलों की दोबारा जांच कराने और पीड़ित परिवारों को पूरी कानूनी सहायता देने के लिए भी तैयार है।

धर्म आधारित कल्याणकारी योजनाएं बंद : मदरसा विभाग और अन्य धर्मों से जुड़ी वित्तीय सहायता वाली योजनाओं को जून महीने से बंद करने का फैसला लिया गया है। सरकार अब बिना किसी भेदभाव के सबके लिए समान योजनाएं चलाएगी।

अन्नपूर्णा योजना : महिलाओं के लिए 1 जून से ‘अन्नपूर्णा योजना’ शुरू होने जा रही है, जिसके तहत उन्हें हर महीने 3,000 रुपए की आर्थिक मदद मिलेगी। इसके अलावा 1 जून से ही राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं के लिए सफर पूरी तरह मुफ्त कर दिया जाएगा।

पुरानी नियुक्तियां रद्द : प्रशासन को दुरुस्त करने के लिए सरकारी बोर्डों, निगमों और आयोगों में मनोनीत किए गए अध्यक्षों और निदेशकों को पद से हटा दिया गया है। साथ ही रिटायरमेंट के बाद दोबारा नौकरी पर रखे गए अफसरों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं।

गोहत्या पर नया नोटिस : सरकार ने गोहत्या से जुड़े 1950 के कानून और 2018 के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में कहा गया है कि बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के किसी भी मवेशी-भैंस की हत्या पूरी तरह से प्रतिबंध है।

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सत्ता विमर्श डेस्क
सत्ता विमर्श (Satta Vimarsh) नाम ही हमारी पहचान है। हमारा मानना है कि सब कुछ सत्ता के इर्द-गिर्द तय होता है, सरकार भी और सरोकार भी। लेकिन, इस सत्ता में हमारी-आपकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सत्ता में बैठे लोगों की। इसीलिए सत्ता और सरोकार से जुड़े मुद्दों पर विमर्श जरूरी है।

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