Gautam Adani Bribery Case : भारत के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडाणी भ्रष्टाचार के जाल में बुरी तरह से फंसते नजर आ रहे हैं। ये अलग बात है कि भारत की सरकार उनके साथ खड़ी है जैसा कि राहुल गांधी हमेशा यह आरोप लगाते हैं। दरअसल, 24 अक्टूबर 2024 को अमेरिका के न्यूयॉर्क की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एक अभियोग दर्ज हुआ। अमेरिका में अडाणी के खिलाफ यहीं से मुकदमें की शुरुआत होती है। लेकिन एक सवाल जो सबके दिमाग में कौंध रहा है कि जब रिश्वत भारत में दी गई तो इस भ्रष्टाचार के तार अमेरिका से कैसे जुड़ गये। इस रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम सहज और सरल तरीके से बताया गया है।
गौतम अडाणी समेत 8 आरोपी कौन हैं?
अमेरिका के न्याय विभाग के आरोप-पत्र में जिन 8 लोगों के नाम हैं उसमें 7 लोग भारतीय हैं। इनमें गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी का नाम शामिल है। एक आरोपी ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस का नागरिक है, लेकिन सिंगापुर में रहता है। इनके अलावा आंध्र प्रदेश के एक बड़े सरकारी अधिकारी सहित दो अन्य लोगों के इस साजिश में शामिल होने की बात कही गई है।
गौतम अडाणी : अडाणी ग्रुप के संस्थापक, चेयरमैन और एनर्जी कंपनी के बोर्ड डायरेक्टर्स में नॉन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे। इस ग्रुप में एनर्जी कंपनी सहित कई पोर्टफोलियो कंपनियां शामिल हैं।
सागर अडाणी : अक्टूबर 2018 से एनर्जी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अडाणी गौतम अडाणी के भतीजे हैं।
विनीत एस. जैन : जुलाई 2020 से मई 2023 तक एनर्जी कंपनी के सीईओ थे। जुलाई 2020 से कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
रणजीत गुप्ता : जुलाई 2019 से अप्रैल 2022 तक अमेरिकी जारीकर्ता कंपनी के सीईओ और इसकी सहायक कंपनी के सीईओ तथा एमडी थे।
सिरिल कैबनेस : सिंगापुर में रहने वाले सिरिल ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के नागरिक हैं। फरवरी 2016 से अक्टूबर 2023 तक कनाडा के निवेशक से जुड़ी एक कंपनी में काम करते थे।
सौरभ अग्रवाल : मई 2017 से जुलाई 2023 तक कनाडा के एक निवेशक से जुड़ी कंपनी में काम करते थे और सिरिल कैबनेस को रिपोर्ट करते थे।
रुपेश अग्रवाल : अमेरिकी जारीकर्ता और उसकी सहायक कंपनी में जुलाई 2022 तक कंसल्टेंट की भूमिका में थे। इसके बाद जुलाई 2022 से अगस्त 2022 तक चीफ स्ट्रैटजी और कॉमर्शियल ऑफिसर रहे। अगस्त 2022 से जुलाई 2023 तक कार्यवाहक सीईओ भी रहे।
दीपक मल्होत्रा : सितंबर 2018 से अक्टूबर 2023 तक कनाडा के निवेशकों से जुड़ी एक कंपनी में काम करते थे। नवंबर 2019 से अक्टूबर 2023 तक अमेरिकी जारीकर्ता और उसकी सहायक कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में नॉन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे।
डील और रिश्वत की पूरी कहानी क्या है?
एसईसीआई यानी सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया भारत सरकार की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी है जिसका उद्देश्य देश में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाना है। एसईसीआई ने भारत में 12 गीगावॉट (12000 मेगावॉट) सौर ऊर्जा की आपूर्ति के लिए कॉन्ट्रैक्ट निकाला था। अभियोग पत्र के मुताबिक, दिसंबर 2019 और जुलाई 2020 के बीच अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड यानी एजीईएल और एक विदेशी फर्म ने कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर लिया। इसके बाद उन्हें लेटर ऑफ अवॉर्ड भी जारी कर दिया गया।
टेंडर की शर्तों के मुताबिक, बिजली खरीदने के लिए राज्य बिजली वितरण कंपनियां खोजने की जिम्मेदारी भारत सरकार की कंपनी एसईसीआई की थी। इस दौरान एजीईएल प्रबंधन की तरफ से एसईसीआई को एक निश्चित कीमत पर सौर ऊर्जा खरीदने के लिए मजबूर किया गया। अब ये कीमत इतनी ज्यादा थी कि एसईसीआई को बिजली खरीददार ढूंढने मुश्किल हो रहे थे। इस वजह से अमेरिकी जारीकर्ता और भारतीय एनर्जी कंपनी की सहायक कंपनी घाटे में पहुंच गई।
अभियोग पत्र के मुताबिक, साल 2020 के आसपास गौतम अडाणी, सागर अडाणी, विनीत जैन, रणजीत गुप्ता ने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर भारत के उन सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई जो राज्यों में ऊर्जा आपूति से जुड़ी कंपनियों में शामिल थे। आरोपी राज्य बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों को बिजली खरीदने के लिए रिश्वत देने की कोशिश करने लगे। आपस में चर्चा करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मैसेजिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल करते थे। इसके लिए गौतम अडाणी ने आंध्र प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों से खुद मुलाकात की।
अभियोग पत्र के मुताबिक रिश्वत के बारे में बात करते वक्त अन्य आरोपी गौतम अडाणी और विनीत जैन को कोडवर्ड में संबोधित करते थे। गौतम अडाणी का कोडनेम- ‘SAG’ , ‘मिस्टर A’, ‘न्यूमरो उनो’ और ‘द बिग मैन’ रखा गया था। विनीत जैन का कोडनेम- ‘V’, ‘स्नेक’ और ‘न्यूमरो उनो माइनस वन’ रखा गया था।
अडाणी पर आरोप है कि रिश्वत के इन पैसों को जुटाने के लिए उन्होंने अमेरिकी निवेशकों और बैंकों से झूठ बोला। अमेरिका में मामला इसलिए दर्ज हुआ, क्योंकि प्रोजेक्ट में अमेरिका के इन्वेस्टर्स का पैसा लगा था और अमेरिकी कानून के तहत उस पैसे को रिश्वत के रूप में देना अपराध है।
यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी ऑफिस का कहना है कि अडाणी ने भारत में सोलर एनर्जी से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को 265 मिलियन डॉलर (करीब 2200 करोड़ रुपए) की रिश्वत दी गई या वादा किया गया। यह पूरा मामला अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक अन्य फर्म से जुड़ा हुआ है। 24 अक्टूबर 2024 को न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में यह केस दर्ज हुआ था। 20 नवंबर 2024 बुधवार को इसकी सुनवाई में गौतम अडाणी, उनके भतीजे सागर अडाणी, विनीत एस. जैन, रंजीत गुप्ता, साइरिल कैबेनिस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल को आरोपी बनाया गया।
21 नवंबर (गुरुवार) को जब यह दस्तावेज सार्वजनिक तौर पर दुनिया के सामने आया और इस मामले में अमेरिका में गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया तो कॉरपोरेट की दुनिया और भारत के पॉवर कॉरिडोर में हंमागा मच गया। हालांकि, अडाणी ग्रुप ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन बाजार तो भरोसे पर चलता है। भरोसा यूं टूटा कि एक झटके में गौतम अडाणी समूह के नेटवर्थ में 1.02 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आ गई। इतना ही नहीं, केन्या ने अडाणी ग्रुप के साथ बिजली ट्रांसमिशन और एयरपोर्ट विस्तार की डील भी रद्द कर दी।
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा- ‘हमारी सरकार पारदर्शिता और ईमानदारी के सिद्धांतों पर काम करती है और ऐसे समझौतों को मंजूरी नहीं देगी, जो देश की छवि और हितों के खिलाफ हों। हम ऐसे किसी भी कॉन्ट्रैक्ट को स्वीकार नहीं करेंगे, जो हमारे देश की नीतियों और मूल्यों के खिलाफ हों।’
केन्या सरकार ने अडाणी ग्रुप के साथ 30 साल के लिए 736 मिलियन डॉलर यानी 6,217 करोड़ रुपए की पावर ट्रांसमिशन डील की थी। इस डील के तहत केन्या में बिजली ट्रांसमिशन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना था। इसके अलावा, अडाणी ग्रुप का 1.8 बिलियन डॉलर यानी 15,205 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भी था, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को विकसित करना था, लेकिन 21,422 करोड़ रुपए की ये दोनों डील अब रद्द कर दी गई हैं।




