बुलडोजर एक्शन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे, एमपी दूसरे और हरियाणा तीसरे नंबर पर

नई दिल्ली : हालांकि देश में किसी आरोपी की संपत्ति रातों-रात जमींदोज किए जाने का कोई कानून बना नहीं है, फिर भी देश के कई राज्यों में बुलडोजर से आरोपियों की संपत्तियां ढहाई गई हैं। भले ही राज्य सरकारें ये दावा करे कि आरोपी होने की वजह से किसी के घर पर बुलडोजर नहीं चलवाया गया, पर हकीकत इससे बिलकुल उलट है।

मीडिया में प्रकाशित खबरों पर अगर भरोसा करें तो पिछले 7 वर्षों में 7 राज्यों में 1,935 आरोपियों की संपत्तियों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। इसमें 1535 कार्रवाई सिर्फ उत्तर प्रदेश में हुईं हैं। बुलडोजर एक्शन के मामले में दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश और तीसरे पर हरियाणा है।

उत्तर प्रदेश में बुलडोजर एक्शन की शुरुआत 2017 में तब हुई थी जब 13 बाहुबली हिस्ट्रीशीटरों के मकानों को ढहा दिया गया था। 2020 में बिकरू कांड में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या को अंजाम देने वाले गैंगस्टर विकास दुबे की 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों पर बुलडोजर एक्शन कर उन्हें जमींदोज किया गया। सभी में अवैध निर्माण और अतिक्रमण को कार्रवाई का कारण बताया गया था।

माफिया मुख्तार अंसारी की 300 करोड़ की संपत्तियों को भी बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। अयोध्या गैंगरेप के मामले में जब सपा नेता मोइन खान गिरफ्तार हुए तो उनके शापिंग कॉम्पलेक्स की 40 दुकानों को बुलडोजर से ढहा दिया गया। कन्नौज गैंगरेप के आरोपी पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव के कोल्ड स्टोरेज को भी ढहाया गया था।

मध्य प्रदेश में पिछले ढाई साल में 259 आरोपियों के घरों पर बुलडोजर एक्शन हुआ है। इनमें 160 आरोपी मुस्लिम थे और 99 हिंदू। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हाल ही में एक सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने यह जानकारी दी।

इस पर केंद्र सरकार के वकील सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने मध्य प्रदेश में हाल ही में 70 दुकानों पर हुए बुलडोजर एक्शन का हवाला दिया। बताया कि उन दुकानों में 50 हिंदुओं की थीं। ऐसे में यह तर्क गलत है कि बुलडोजर एक्शन सिर्फ मुस्लिम समुदाय पर हो रहा है।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने यानी 17 सितंबर को राज्यों में बुलडोजर एक्शन के मामले पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने आगामी 1 अक्टूबर तक बुलडोजर एक्शन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक देश में एक भी बुलडोजर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऑर्डर में सड़कों, फुटपाथों, रेलवे लाइंस के अवैध अतिक्रमण शामिल नहीं हैं।

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सत्ता विमर्श डेस्क
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