नई दिल्ली : 18वीं लोकसभा के पहले शीतकालीन सत्र की शुरुआत 25 नवंबर 2024 को हुई और सत्र का हश्र ये हुआ कि चार दिनों में सदन की कार्यवाही सिर्फ 40 मिनट चली। हर दिन औसतन दोनों सदन (लोकसभा और राज्यसभा) में करीब 10-10 मिनट तक ही कामकाज हुआ।
लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने अडाणी और संभल का मुद्दा उठाया। विपक्षी सांसद कार्यवाही के दौरान लगातार हंगामा करते रहे। स्पीकर ने कई बार उन्हें समझाने की कोशिश की, मगर विपक्षी सांसद शांत नहीं हुए।
शुक्रवार को स्पीकर ओम बिरला ने कहा- सहमति-असहमति लोकतंत्र की ताकत है। मैं आशा करता हूं कि सभी सदस्य सदन को चलने देंगे। देश की जनता संसद के बारे में चिंता व्यक्त कर रही है। सदन सबका है, देश चाहता है संसद चले। लेकिन, राहुल गांधी पहले ही संसद के बाहर कह चुके थे कि गौतम अडाणी पर अमेरिका में 2 हजार करोड़ की रिश्वत देने का आरोप लगा है। उन्हें जेल में होना चाहिए। मोदी सरकार उन्हें बचा रही है।
संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन यानी शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों का जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी सदस्यों ने अडानी रिश्वतखोरी मामला और संभल हिंसा समेत अन्य मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखा। हंगामा बढ़ते देख लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष इन मुद्दों पर चर्चा की मांग पर अड़ा रहा।
राज्यसभा में हंगामा
दरअसल, सुबह के सत्र में सूचीबद्ध पत्रों को रखे जाने के तुरंत बाद, राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्हें सदन के नियम 267 के तहत कार्यसूची को स्थगित करने के लिए 17 नोटिस मिले हैं। विपक्षी सांसदों ने अडानी समूह के खिलाफ भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के आरोपों, उत्तर प्रदेश के संभल में सांप्रदायिक हिंसा और मणिपुर में जातीय संघर्ष पर चर्चा के लिए नोटिस दिए थे। सभापति ने कहा कि वह सभी नोटिसों को अस्वीकार कर रहे हैं। इससे कई विपक्षी सांसदों ने विरोध किया और नारेबाजी शुरू कर दी।
धनखड़ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, ‘मैं आपसे (सांसदों से) गहन चिंतन का आह्वान करता हूं। नियम 267 का इस्तेमाल व्यवधान के हथियार के रूप में किया जा रहा है।’ कांग्रेस सहित विपक्षी सांसदों ने इस टिप्पणी का विरोध किया। विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी के बीच धनखड़ ने कहा, ‘…इसकी सराहना नहीं की जा सकती। हम एक बहुत बुरी मिसाल कायम कर रहे हैं। हमारे कार्य जन-केंद्रित नहीं हैं। हम अप्रासंगिक होते जा रहे हैं…’ राज्यसभा के सभापति ने सदन की कार्यवाही 2 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
लोकसभा में नारेबाजी
इस बीच, लोकसभा की कार्यवाही शुरू में दोपहर तक और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी सदस्यों ने अडानी विवाद और उत्तर प्रदेश के संभल में हाल की हिंसा को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। जैसे ही सदन की बैठक शुरू हुई, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने कई मुद्दे उठाने की कोशिश की। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कुछ सदस्य सदन के वेल में भी थे और नारे लगा रहे थे। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन को चलने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग चाहते हैं कि सदन चले और चर्चा हो। प्रश्नकाल के दौरान लगभग 10 मिनट तक दो प्रश्न उठाए गए। हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही दोपहर और फिर सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।




