नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं के लिए 2100 रुपए महीने और बुजुर्गों के मुफ्त इलाज वाली स्कीम्स का वादा किया। बीते 23 दिसंबर से इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिया गया, लेकिन 25 दिसंबर को दिल्ली सरकार के ही दो विभागों के अधिकारियों ने अखबारों में विज्ञापन देकर इसे फ्रॉड करार दिया। क्या वाकई अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं और बुजुर्गों के लिए नई स्कीम्स का वाद कर दिल्ली की जनता से धोखा किया है? आइए जानते हैं असल सच क्या है।
विज्ञापन में क्या छपवाया अधिकारियों ने?
दिल्ली सरकार के महिला और बाल विकास विभाग के जॉइंट डायरेक्टर की ओर से अखबार में जो विज्ञापन दिया गया उसमें कहा गया है, ‘एक राजनीतिक पार्टी दिल्ली की महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला योजना के तहत 2,100 रुपए प्रति माह देने का दावा कर रही है। यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना अधिसूचित नहीं की गई है।’ विज्ञापन में आगे लिखा गया है, ‘दिल्ली की जनता को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी गैर-मौजूद योजना के वादों पर विश्वास न करें, क्योंकि ये भ्रामक और बिना किसी अधिकार के हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ऐसी किसी भी देनदारी या धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।’
दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव की ओर से भी इसी तरह का एक और विज्ञापन जारी किया गया। इसमें संजीवनी योजना को फ्रॉड बताया गया है। इसमें कहा गया है, ‘आज तक ऐसी कोई भी कथित संजीवनी योजना अस्तित्व में नहीं है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने न तो किसी स्वास्थ्य अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को बुजुर्ग नागरिकों से ऐसी व्यक्तिगत जानकारी और डेटा एकत्र करने के लिए अधिकृत किया है, न ही विभाग इस संबंध में कोई कार्ड प्रदान करता है।’
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने दिल्ली की जनता को 3 सलाह दीं… पहला यह कि कथित गैर-मौजूद संजीवनी योजना के तहत मुफ्त इलाज के किसी भी वादे पर विश्वास न करें। दूसरा- योजना के तहत फायदा देने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई व्यक्तिगत जानकारी न दें। और तीसरा- अनजाने में किसी भी दस्तावेज पर अपना हस्ताक्षर या अंगूठा न लगाएं।
क्या वाकई केजरीवाल ने जनता से फ्रॉड किया है?
दरअसल, देश और दिल्ली के लोगों को समझना होगा कि अरविंद केजरीवाल की ये दोनों घोषणाएं फिलहाल सिर्फ चुनावी वादे हैं, कोई सरकारी स्कीम्स नहीं। संजीवनी योजना और महिला सम्मान योजना को जमीनी स्तर पर अभी लागू नहीं किया गया है, क्योंकि आप सरकार के पास समय नहीं बचा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को इन स्कीम के वादों को पूरा करने के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें लेफ्टिनेंट गवर्नर की स्वीकृति की भी जरूरत होगी। लिहाजा तकनीकी तौर पर अरविंद केजरीवाल ने यह घोषणा कर कोई फ्रॉड नहीं किया है। लेकिन बीजेपी और कांग्रेस दिल्ली की जनता को बरगलाने की भरपूर कोशिश करेगी कि केजरीवाल लोगों को चुनाव से पहले धोखा दे रहे हैं।
केजरीवाल को बदनाम करने की भाजपाई चाल तो नहीं
असल में चुनाव से ठीक पहले आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को बदनाम करने के लिए भाजपा की यह सोची-समझी चाल है। दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने भी दिल्ली सरकार के अधिकारियों द्वारा जारी इन दोनों विज्ञापन की शक्ल में दी गई सूचना को झूठ बताया। सीएम आतिशी ने साफ तौर पर कहा है, ‘जो नोटिस आज छपे हैं, वो गलत हैं। कुछ अफसरों पर भाजपा ने दबाव बनाकर गलत सूचना छपवाई है। अफसरों के खिलाफ एडमिनिस्ट्रेटिव और पुलिस कार्रवाई होगी।’
अब मुख्य बात इसमें यह है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अध्यादेश, 2023 के मुताबिक, दिल्ली की सीएम आतिशी सीधे अधिकारियों पर कोई कार्रवाई कर नहीं सकती हैं। अधिकारियों पर ट्रांसफर, सस्पेंड या किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए उन्हें नेशनल कैपिटल सिविल सर्विस अथॉरिटी में मामले को ले जाना होगा। वहां उनके साथ दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह प्रधान सचिव मामले पर चर्चा करेंगे। ये सर्वविदित है कि दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह प्रधान सचिव केंद्र सरकार नियुक्त करती है, ऐसे में वह ऐसी किसी भी कार्रवाई का समर्थन नहीं करेंगे। बावजूद इसके अथॉरिटी कोई एक्शन लेने का फैसला करती है, तो उसमें आखिरी फैसला दिल्ली के उपराज्यपाल का होगा। बस बात खत्म हो गई।




