नई दिल्ली। वक्फ संशोधन बिल 2025 लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा के बाद पास हो गया। 288 सांसदों ने पक्ष में और 232 ने विपक्ष में वोट डाला। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे पेश किया था। मोदी सरकार ने इसे उम्मीद (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया है।
इस बिल को केंद्र की मोदी सरकार में शामिल तेलुगू देशम पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी ने समर्थन दिया। इस बिल पर बहस की खास बात यह रही कि चर्चा के दौरान एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इस बिल का मकसद मुसलमानों को जलील करना है। मैं महात्मा गांधी की तरह वक्फ संशोधन बिल को फाड़ता हूं। बिल फाड़ने के बाद ओवैसी संसद की कार्यवाही छोड़कर चले गए।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- वक्फ में गैर इस्लामिक नहीं आएगा। ऐसा कोई प्रोविजन भी नहीं है। वोट बैंक के लिए अल्पसंख्यकों को डराया जा रहा है। शाह ने यह भी कहा कि एक सदस्य ने कहा है कि यह बिल माइनॉरिटीज स्वीकार नहीं करेगी। क्या धमकी दे रहे हो भाई। संसद का कानून है, यह कानून भारत सरकार का है और इसे आपको स्वीकार करना होगा।
बिल पर चर्चा में किरण रिजिजू ने 58 मिनट तक अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 5 मार्च 2013 को 123 प्राइम प्रॉपर्टी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दीं। ऐसा लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अल्पसंख्यक वोटों के लिए किया गया, पर चुनाव हार गए।
रिजिजू ने कहा- अगर हमने आज यह संशोधन बिल पेश नहीं किया होता तो जिस इमारत में हम बैठे हैं, उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में नहीं आती तो कई अन्य संपत्तियां भी गैर-अधिसूचित हो गई होतीं।
बहरहाल, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बोला- बिल पास हुआ तो देशभर में आंदोलन करेंगे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा, ‘अगर यह बिल संसद में पास हो जाता है, तो हम इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हम शांतिपूर्ण आंदोलन चलाएंगे।’
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने X पर पोस्ट किया- वक्फ (संशोधन) बिल मुसलमानों को उनके व्यक्तिगत कानूनों और संपत्ति अधिकारों से वंचित करने का एक हथियार है। यह बिल संविधान पर हमला है और यह RSS, BJP और उनके सहयोगियों की ओर से मुसलमानों के खिलाफ साजिश है।
राहुल ने आगे लिखा- यह कदम सिर्फ मुसलमानों को निशाना बना रहा है, लेकिन भविष्य में इसका इस्तेमाल अन्य समुदायों के खिलाफ भी हो सकता है। यह बिल संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार (आर्टिकल 25) का उल्लंघन है। यह भारत के विचारों पर हमला है।




