वाराणसी। देश के प्रधानमंत्री को भी यहां थोड़ी देर के लिए अपना सिर झुकाना पड़ता है। है न बड़ी अचंभित करने वाली बात। डीएम यानी जिलाधिकारी कुर्सी पर बैठा हो और देश का प्रधानमंत्री हाथ जोड़कर सामने खड़ा हो ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है। पांच साल में शायद एक बार और वह भी चुनाव नामांकन के वक्त।
14 मई 2024 को काशी नगरी के जिला कार्यालय में कुछ इसी तरह का नजारा देखने को मिला। यही भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है, भारत के गवर्नेंस मॉडल की खूबसूरती है, चुनावी लोकतंत्र की खूबसूरती है कि जब भी कोई भी उम्मीदवार अपना पर्चा भरने जिला कार्यालय में जिलाधिकारी के समक्ष पेश होता है तो सिर झुकाकर अभिभादन करते हुए नामांकन पत्र थमाना होता है और जब तक डीएम साहब बैठने के लिए बोलें नहीं तब तक सामने खड़े रहना होता है। ये होता एक आईएएस अधिकारी का पावर।
दरअसल, आईएएस अधिकारी जिलाधिकारी के रूप में काफी पावरफुल होता है। एक आईएएस के पास जिले के सभी विभागों की जिम्मेदारी रहती है। जिले की तमाम व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी उसके पास होती है। निषेधाज्ञा, धारा 144 और लॉ एंड ऑर्डर से जुड़े तमाम फैसले वह स्वयं लेता है। आईएएस की पावर का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 14 मई को नामांकन पत्र भरने पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने कुर्सी पर बैठे कलेक्टर को पहले नमस्कार किया और फिर आगे की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान आईएएस अधिकारी एक पल के लिए भी कुर्सी से खड़ा नहीं हुआ।
आखिर चुनाव नामांकन पत्र होता क्या है?
लोकसभा का चुनाव लड़ने वाले हर उस व्यक्ति को चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हो, फॉर्म-2ए जमा करना होता है। यह छह पेज का फॉर्म होता है जिसके छह भाग होते हैं। पहले भाग में उम्मीदवार को संसदीय क्षेत्र का नाम, उम्मीदवार का नाम, पिता का नाम और अपने पते के अलावा इस बात की भी जानकारी देनी होती है कि वह व्यक्ति किस विधानसभा क्षेत्र का मतदाता है और वह विधानसभा क्षेत्र किस संसदीय क्षेत्र में आता है।
नामांकन फॉर्म का दूसरा भाग उन लोगों के लिए होता है जो किसी मान्यता प्राप्त दल की ओर से उम्मीदवारी नहीं कर रहे हैं। हालांकि इसमें भी उम्मीदवार को पहले हिस्से की तरह अपनी पूरी जानकारी देनी होती है अपने 10 प्रस्तावकों की जानकारी के साथ।
इस फार्म के तीसरे हिस्से में उम्मीदवार को अपनी नागरिकता, आयु और उस पार्टी के बारे में जानकारी देनी होती है, जिसकी ओर से वह चुनाव लड़ना चाहता है। इसी भाग में निर्दलीय उम्मीदवारों को अपने लिए तीन चुनाव चिह्नों का विकल्प भी देना होता है। इसी हिस्से में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को अपनी जाति और उपजाति का विवरण देना होता है। इसी हिस्से में फॉर्म 3A भी होता है। इसमें उम्मीदवार को उन मामलों की जानकारी देनी होती है जिनमें उन्हें सजा हुई है।
नामांकन फॉर्म का चौथा भाग चुनाव अधिकारी की ओर से भरा जाता है जिसमें इस बात का उल्लेख किया जाता है कि उन्हें नामांकन पत्र किस दिन, किस तारीख और किस समय मिला। इसमें प्रस्तावक की भी जानकारी दी जाती है।
नामांकन फॉर्म के पांचवें भाग में चुनाव अधिकारी यह बताते हैं कि नामांकन फॉर्म को स्वीकार किया गया है या अस्वीकार कर दिया गया है। यह जानकारी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 (43 ऑफ 1951) की धारा 36 के तहत दी जाती है।
नामांकन फॉर्म का छठा हिस्सा पावती की तरह होता है। इसमें नामांकन फॉर्म प्राप्त करने की जानकारी दी जाती है कि किस तारीख को और कब मिला। इसमें यह भी बताया जाता है कि उनकी जांच कब और कितने बजे की जाएगी। इसमें चुनाव अधिकारी अपने दस्तखत करता है और तारीख डालता है।
इसके अलावा उम्मीदवार को नामांकन फॉर्म के साथ उम्मीदवार को एक हलफनामा भी देना होता है। इस हलफनामे में उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक जानकारी, परिवार की चल-अचल संपत्ति का विवरण और उसका कोई आपराधिक इतिहास है तो उसका विवरण देना होता है। यह पूरी प्रक्रिया जिला कार्यालय में जिलाधिकारी जो चुनाव अधिकारी भी होता है के समक्ष पूरी करनी होती है।




