नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के रिवीजन पर भले ही रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को साफतौर पर कहा कि आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड को भी पहचान पत्र के तौर पर स्वीकार करना होगा।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) यानी वोटर लिस्ट रिवीजन पर देश की शीर्ष अदालत में करीब तीन घंटे तक सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि वोटर लिस्ट रिवीजन नियमों को दरकिनार कर किया जा रहा है। वोटर की नागरिकता जांची जा रही है। ये कानून के खिलाफ है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 28 जुलाई 2025 को होगी।
आधार को चुनाव आयोग को लगाई फटकार
अदालत में याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित 11 दस्तावेजों की उस सूची पर आपत्ति जताई जिनमें से नागरिकता सिद्ध करने के लिए आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र को हटा दिया गया है, खासकर उन मतदाताओं के लिए जो 2003 की मतदाता सूची में शामिल नहीं थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से गोपाल शंकरनारायण ने दलील दी कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of People Act) के अनुसार, आधार एक स्वीकार्य दस्तावेज़ है, लेकिन चुनाव आयोग बिहार SIR में इसे स्वीकार नहीं कर रहा है।
इस पर जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्य की बेंच ने चुनाव आयोग से पूछा कि आधार कार्ड को स्वीकार क्यों नहीं किया गया। इस दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने जवाब दिया कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। तब जस्टिस धूलिया ने कहा, “लेकिन नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग का नहीं, बल्कि गृह मंत्रालय (MHA) का कार्यक्षेत्र है। इस पर चुनाव आयोग की ओर से जवाब दिया गया कि आयोग को अनुच्छेद 326 के तहत अधिकार प्राप्त हैं।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बागची ने अपनी सख्त टिप्पणी में कहा कि अगर आपका निर्णय यह है कि 2025 की मतदाता सूची में पहले से दर्ज व्यक्ति को भी मताधिकार से वंचित किया जाए तो उस व्यक्ति को अपील करनी होगी, पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा और अंततः आगामी चुनाव में उसके मतदान का अधिकार छिन जाएगा। आप मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए गहन जांच कर सकते हैं ताकि गैर-नागरिक सूची में न रहें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन अगर आप यह कार्य प्रस्तावित चुनाव से कुछ ही महीने पहले शुरू करते हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
SIR के खिलाफ राजद सांसद मनोज झा, TMC सांसद महुआ मोइत्रा समेत 11 लोगों ने याचिकाएं दाखिल की थीं। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई कीं। याचिकाकर्ता की ओर से वकील गोपाल शंकर नारायण, कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी दलील दे रहे थे। चुनाव आयोग की पैरवी पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, राकेश द्विवेदी और मनिंदर सिंह कर रहे थे।




