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मैं कौन हूं, क्या हूं, क्यों हूं, यह सब खुद मुझे भी नहीं पता क्यों कि खुद के बारे में बताना, जताना या उकेरना सबसे मुश्किल काम होता है। हां! बुद्ध, गांधी, विवेकानंद और गीता के दर्शन से मैंने अपने जीवन को संवारने की कोशिश जरूर की है। बिहार के बेगूसराय जिले का रहने वाला हूं। जाने-अनजाने में पत्रकारिता के आंगन में ढाई दशक से अधिक वक्त से कूद-फांद कर रहा हूं। शुरूआती दौर में जी भरकर देश के तमाम राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में वैचारिक लेखन किया। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विषयों पर लिखने में अपनी रूचि रहती है। फिलहाल भारत सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर लेखन कर रहा हूं। डिजिटल और सोशल मीडिया कंसल्टेंट के तौर भी हाथ साफ करता रहता हूं। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान फेक न्यूज़ की बयार को गहराई से जांचा परखा था। उससे पहले नोएडा स्थित ज़ी न्यूज़ में हिन्दी वेबसाइट की शुरूआत कर काफी लंबा वक्त गुजारा। इससे भी पीछे का पूछेंगे तो करीब डेढ़ दशक तक दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, अमर उजाला, दैनिक भास्कर समेत कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय अखबारों के संपादकीय विभाग में अलग-अलग भूमिकाओं को निभाते हुए एक पत्रकार के तौर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश की, एक बेहतर इंसान भी बनने की कोशिश की, पर कितना बन पाया ये सब ''ऊपर वाले पर'' छोड़ता हूं...